Uncategorized

सीतापुर में फर्जीवाड़े की बड़ी आहट: डॉक्टर तौसीफ इलाही की डिग्रियों में मिलावट का खुलासा

   सीतापुर

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे जिला प्रशासन और प्रांतीय स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख दिया है। कई नामी निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे डॉक्टर तौसीफ इलाही की शैक्षणिक योग्यता और रजिस्ट्रेशन नंबरों को लेकर बड़े पैमाने पर विसंगतियां उजागर हुई हैं। मरीजों की जान से खिलवाड़ और फर्जीवाड़े की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
​एक डॉक्टर, कई डिग्रियां और अलग-अलग रजिस्ट्रेशन
​सरकारी व गैर-सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों में सामने आए आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। डॉक्टर के नाम पर दर्ज दावों का ब्यौरा इस प्रकार है:
​वर्ष 2016: दस्तावेजों में एलोपैथिक डिग्री यानी MBBS का उल्लेख।
​वर्ष 2019: वाराणसी विश्वविद्यालय से BMS (आयुष) करने का दावा, जिसके साथ रजिस्ट्रेशन नंबर 326051 दर्ज।
​वर्ष 2020: एक कानूनी शपथ पत्र में पुन: BMS डिग्री होने का औपचारिक दावा।वर्ष 2022: स्वयं को सर्जन काउंसलर के रूप में दर्शाया गया, जहां काउंसलर रजिस्ट्रेशन नंबर 50644 इस्तेमाल हुआ।
​एक ही चिकित्सा पेशेवर द्वारा समय-समय पर योग्यता और रजिस्ट्रेशन में इस तरह के विरोधाभासी दावे प्रस्तुत करना किसी बड़ी अनियमितता की ओर इशारा कर रहा है।
​निजी अस्पतालों में जाल और मरीजों की जान पर खतरा
​सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर तौसीफ इलाही की ये संदिग्ध डिग्रियां सीतापुर के कई प्रमुख निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में प्रदर्शित की गई हैं। एलोपैथी और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के इस संदिग्ध घालमेल के बीच सैकड़ों मरीज प्रतिदिन इलाज करवा रहे हैं, जिससे यह मामला सीधे आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ गया है।
​प्रशासनिक लापरवाही और खड़े होते यक्ष प्रश्न
​इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सीतापुर जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय कटघरे में है:
​सत्यापन में चूक: अस्पताल पंजीकरण और नवीनीकरण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने इन विरोधाभासी डिग्रियों को हरी झंडी कैसे दी?
​निगरानी पर सवाल क्या विभाग ने मेडिकल काउंसिल और संबंधित विश्वविद्यालयों से इन डिग्रियों और रजिस्ट्रेशन नंबरों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया था?
​कार्रवाई में देरी: जब दस्तावेजों में खुलेआम वर्ष और डिग्री बदल रहे हैं, तो अब तक एफआईआर (FIR) या उच्चस्तरीय जांच के आदेश क्यों नहीं दिए गए?
​आधिकारिक पुष्टि और आगामी कार्रवाई का इंतजार
​हालांकि इन सभी दस्तावेजों और दावों का संबंधित मेडिकल कौंसिलों एवं विश्वविद्यालयों से स्वतंत्र व आधिकारिक सत्यापन होना अभी बाकी है। किंतु प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच चुका है। अब देखना यह होगा कि सीतापुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कड़े कदम उठाता है और दोषी पाए जाने पर क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

Related posts

05 और 19 सितंबर को होगा सम्पूर्ण समाधान दिवस, अधिकारी सुनेंगे जनसमस्याएं

prodoxy.ai@gmail.com

सिद्धार्थनगर: शांति भंग की आशंका में दो आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय भेजे गए

prodoxy.ai@gmail.com

शिवहर में SH-54 मिसिंग लिंक सड़क निर्माण को मिली रफ्तार, डीएम ने की जनसुनवाई

prodoxy.ai@gmail.com

Leave a Comment