नई दिल्ली/विशेष रिपोर्ट। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है, लेकिन हाल के वर्षों में फर्जी पत्रकारों की बढ़ती संख्या प्रशासन, सरकारी विभागों और समाज के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। कई स्थानों पर ऐसे लोग स्वयं को पत्रकार बताकर सरकारी कार्यालयों में दबाव बनाने, अनुचित लाभ लेने या अवैध वसूली करने के आरोपों में सामने आते रहे हैं। इससे न केवल पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि ईमानदारी से कार्य करने वाले पत्रकारों की छवि भी धूमिल होती है।

विशेष रूप से होली, दीपावली और अन्य अवसरों पर कथित रूप से कुछ लोग अचानक मीडिया प्रतिनिधि बनकर विभिन्न कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग अपने यहां मान्यता प्राप्त अथवा पंजीकृत पत्रकारों की अद्यतन सूची सभी सरकारी विभागों और अधिकारियों को उपलब्ध कराए। यदि संभव हो तो इस सूची को सार्वजनिक पोर्टल पर भी प्रदर्शित किया जाए, जिससे वास्तविक और फर्जी पत्रकारों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।
यदि कोई व्यक्ति पत्रकार होने का दावा कर अवैध वसूली, धमकी, पद के दुरुपयोग या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति या संस्था को इसकी शिकायत संबंधित पत्रकार संगठन, पुलिस और प्रशासन से करनी चाहिए। प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सिद्ध हों तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पत्रकारिता का उद्देश्य समाज और प्रशासन के बीच पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को मजबूत करना है। इसलिए आवश्यक है कि फर्जी पत्रकारों पर प्रभावी कार्रवाई हो और वास्तविक पत्रकारों की गरिमा तथा विश्वसनीयता सुरक्षित रखी जाए।
