सीतापुर। धरनाग क्षेत्र के नेवादा गांव में रविवार को आचार्य सूरज शुक्ला जी के सान्निध्य में शिव परिवार एवं हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। राम जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरे पंडाल में प्रभु श्रीराम के जयकारे गूंज उठे।

कथावाचक श्री दिलीप महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार पृथ्वी पर बढ़ते पाप, अधर्म और असुर शक्तियों के विनाश के लिए हुआ था। उन्होंने बताया कि भगवान राम ने बाल्यकाल से ही राक्षसी शक्तियों का नाश कर धर्म की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया था।
कथावाचक ने भगवान श्रीराम के मानव रूप में जन्म लेने के प्रमुख कारणों का उल्लेख करते हुए बताया कि नारद मोह प्रसंग, पृथ्वी पर बढ़ता पाप, जय-विजय को सनकादि ऋषियों का श्राप, मनु-सतरूपा की कठोर तपस्या एवं प्राप्त वरदान तथा राजा प्रताप भानु और अरिमर्दन को ब्राह्मणों द्वारा दिए गए श्राप जैसे कारणों से भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से मर्यादा, धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश दिया तथा मानव समाज को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान की।
राम जन्म प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु बधाई गीतों और बाजों की धुन पर जमकर झूमे और नृत्य करते नजर आए। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर परीक्षित के रूप में श्री राधेश्याम पाल, श्री पवन कुमार पाल, श्री नीरज पाल, श्री धीरज पाल सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
