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शिवपुरी के निजी D.El.Ed कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जांच की मांग

प्रवेश प्रक्रिया और प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग, विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर जताई चिंता*

शिवपुरी, मध्य प्रदेश। जिले में संचालित निजी D.El.Ed कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रवेश प्रक्रिया से लेकर विद्यार्थियों के प्रशिक्षण तक की व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। कुछ आरोपों के बीच संबंधित विभाग की निगरानी और कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी को लेकर कई सवाल हैं। प्रवेश परीक्षा कहां आयोजित की जा रही है, इसकी सूचना विद्यार्थियों को किस माध्यम से दी जा रही है और संबंधित संस्थानों की क्या जिम्मेदारी है, इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। विद्यार्थियों के हित में प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित नियमों और सूचनाओं को सार्वजनिक करना आवश्यक बताया जा रहा है।

प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल

D.El.Ed पाठ्यक्रम में नियमित कक्षाओं और व्यावहारिक प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कुछ विद्यार्थियों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि कॉलेजों में नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा कॉलेजों की कक्षाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य शैक्षणिक अभिलेखों की जांच किए जाने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

प्रशासन की निगरानी पर उठे प्रश्न

निजी कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच संबंधित शिक्षा अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कॉलेजों में निर्धारित नियमों के अनुसार कक्षाओं का संचालन हो रहा है या नहीं और प्रशिक्षण व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा रही है या नहीं, इसकी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग से प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षण व्यवस्था, कक्षाओं के संचालन और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, संबंधित कॉलेजों और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने तथा जांच के निष्कर्ष प्राप्त होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ब्यूरो चीफ: जितेंद्र जैन\

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